Friday, October 1, 2021

एक कप चाय हो जाये।


आज बे-मौसम बदली बरस रही है,

और मेरी धर्मपत्नी पकोड़ों को तरस रही है।

अजी सुनते हो, रोमांटिक होके आवाज लगाती है,

बड़े प्यार से अपनी इक्षा जताती है।

सुनो न मौषम बड़ा सुहाना है,

लगता है अभी भी 90 का जमाना है।

इस सुस्ती को भगाने का कुछ उपाय हो जाये,

क्या कहते हो, एक कप चाय हो जाये।

 

चाय तो मैं बना दूंगी, पर पकोड़े तुम्ही बनाना,

हाँ आलू थोड़ा कम और दो - चार मिर्ची ज्यादा ही मिलाना।

पकोड़े अपनी तरह सादा मत बनाना,

चटनी के साथ थोड़ा अपना प्यार भी मिलाना।

कोई बात नहीं अगर सुबह से शाम हो जाये,

क्या कहते हो, एक कप चाय हो जाये।

 

अब मुझे याद आने लगे थे वो दिन,

जो गुजरते न थे तेरे बिन।

वो पहली मुलाकात जब प्यार के गुल खिले थे,

हम CCD को छोड़कर चाय की टपरी पे मिले थे।

तुमने कहा था काश ये शाम यादगार हो जाये,

तो ठीक है चलो फिर, एक कप चाय हो जाये।

 

मुझे अब भी याद है वो दिसंबर का महीना था,

जब मैंने एक शर्ट और उसके ऊपर कई सारा स्वेटर पहना था।

उस दिन सर्दी से क्या गजब ढाया था,

पर फिर भी तुमसे मिलने मैं तुम्हारे घर आया था।

तेज बारिश और आने की जिद, तो आया, चाहे बुखार हो जाये।

क्या कहते हो, एक कप चाय हो जाये।

 

बदन कप रहा था और दांतो से संगीत बज रहा था,

मैं ड्राइंग रूम में बैठा था, और अंदर मेरा ताजमहल सज रहा था।

तुमने इंतज़ार भी उस दिल बहुत ज्यादा कराया था,

पूरे 15 मिनट और 12 सेकंड के बाद तुम्हारा दर्शन हो पाया था।

बस सोच रहा था की तेरा दिल भी बेकरार हो जाये,

तभी आवाज आयी, क्या कहते हो, एक कप चाय हो जाये।

 

पहली मुलाकात में जीवन की सारी ख़ुशियाँ समाई थीं,

जब तुम सुर्ख़ लाल लिवाज में चाय लेकर आई थी।

आँखों ने आँखों से कुछ बात की थी,

दिल ने दिल से मुलाकात की थी।

दिल कह रहा था की तुझे लेकर कहीं फरार हो जाये।

जब तुमने कहा था, सुनिए जी एक कप चाय हो जाये।

 

तो दोस्तों अगर कविता अच्छी लगी है तो,

लाइक, शेयर, कमैंट्स और चैनल सब्सक्राइब हो जाये।

और फिर साथ बैठकर एक कप चाय हो जाये।

 

अमित बृज किशोर खरे "कसक"

Insta ID: @amitbkkhare and @kasakastory




मेरी कहानी (पार्ट - 11) - शर्मा जी की सरप्राइज पार्टी

 


25 जुलाई 2021,अपनी बालकनी में बैठे न्यूज़ पेपर के साथ सुबह की चाय की चुस्कियां लेते हुए शर्मा जी कहते हैं

बिमला ! अरे यार तुमने चाय में चीनी कुछ ज्यादा ही दाल दी है, कहीं चखी तो नहीं थी।

आप भी न जितने बूढ़े होते जा रहे हो उतने ही सठिया रहे हो। हमें पता है आपको शुगर है इसलिए चीनी नहीं शुगर फ्री डाली है।

पता है पता मैं तो बस कह रहा था की तुम्हारी चुस्खी में अभी भी उतनी ही मिठास है, जितनी कॉलेज टाइम में थी।

बुढ़ापा आगया है पर जवानी अब तक नहीं गयी, अरे 75 पार हो चुके हो अब भगबान का भजन करो।

हमारी तो पूजा, आरती, वंदना, अर्चना और प्रार्थना तुम्ही हो, जीना यहाँ, मरना यहाँ तेरे सिवा जाना कहाँ।

तुमसे तो बहस करना बेकार है, अब तो पूरे ही सठिया गए हो। हे भगवान, अगर हमारे समय में लड़का देखने का चलन होता तो कुवांरी मर जाती पर इस आदमी से तो कभी शादी नहीं करती।

अच्छा वो मैनेजर बबलू आया था, पूछ रहा था कि शहर जा रहा है अगर कुछ मगाना हो तो बता दो। मैंने अपना सामान लिख दिया है टेबल पे पर्ची रखी है तुम भी लिख दो शाम तक आजायेगा। इतना कहते हुए बिमला जी बाहर गार्डन में घूमने चली गयी।

शर्मा जी हाथ में पर्ची उठाये सोच रहे थे की क्या मांगऊ, अपनी सोसाइटी में सब तो मिल जाता है।

तभी उन्हें याद आया की आज तो बिमला जी की जनम तिथि है सावन का महीना और कृष्ण पक्ष की दोज। तो क्यों न बिमला जी के लिए ही कुछ मंगा लिया जाये। फिर क्या था बबलू को बुलवाया गया और अलग से एक पर्ची थमा दी गई इस हिदायत के साथ कि वो सामान सिर्फ शर्मा जी को ही दिया जाये और वो भी अकेले में।

सुबह से दोपहर हो चली थी पर शर्मा जी अभी तक न्यूज़ पेपर से चिपके थे। सोसाइटी में आने वाले सभी न्यूज़ पेपरों पर शर्मा जी की निगाह सबसे पहले पड़ती थी। और सभी न्यूज़ पेपर में सिर्फ वही पेज पड़ते थे जिसमें अंतर्राष्ट्रीय समाचार हों। संयुक्त राष्ट्र अमेरिका की ख़बरें कुछ ज्यादा ही चाओ से पड़ते थे। चुकी आज अंतरराष्ट्रीय माता-पिता दिवस यानि International Parents Day था तो अधिकतर उसी पे आधारित विज्ञापन और शुभ सन्देश कुछ ज्यादा ही छपे थे।

 

पता नहीं मुआ क्या चासनी लगी है इन अखवारों में, जो इन्ही से चिपके रहते हो। बिमला जी ने मुँह बनाते हुए बोला।

तुम्हारे ही अक्स की तलाश में हूँ, पर मुआ मिलता ही नहीं। शर्मा जी ने भी बिमला जी की नक़ल उतारते हुए कहा।

 

15 साल से तो ढूंढ रहे हो, अब तक कुछ मिला, जो अब मिलेगा। बिमला जी ने भी तपाक से जबाब दिया।

चलो अब इन अखवारों की पोटली बनाओ और दफा करो यहाँ से, और भी बूढ़े और सठियाये हुए लोग है हमारी सोसाइटी में उनको भी कुछ न कुछ ढूढ़ना होता है।

 

अच्छा बाबा ठीक है, अब तुम्हारी आज्ञा का पालन तो करना ही पड़ेगा, हमारी सरकार जो ठहरीं।

 

ज्यादा बातें मत बनाओ, नहा धो लो, लंच का टाइम भी हो गया है।

 

शाम को शर्मा जी ने जो मंगाया था, मैनेजर उनको चुपके से आकर दे गया। शर्मा जी ने मैनेजर से कहकर सोसाइटी के बड़े से हॉल में एक छोटी सी सरप्राइज पार्टी ऑर्गनाइज करने का प्लान कर लिया।

 

बिमला जी की सभी महिला मित्रों को चुपसे बुलावा भी भेज दिया गया और मैनेजर से कहकर रात के खाने में बिमला जी की पसंद की परबल और छोले, की सब्जियां, खीरे का रायता और रोटियों, मिठाई में गुलाब जामुन की व्यवस्था करा दी गई। अरे हाँ, शुगर फ्री काजू-कतली भी जो बिमला जी और शर्मा जी दोनों को बहुत पसंद थी। और शर्मा जी ने मैनेजर से अलग से मंगवाई थी। शर्मा फॅमिली का कोई भी सेलिब्रेशन काजू कतली के बिना अधूरा होता था। ये परंपरा शर्मा जी के परिवार में पिछले 50 साल से चल रही थी।

 

शाम को तय समय के अनुसार सभी हॉल में इक्क्ठा हो गए और सरप्राइज पार्टी की शुरुआत शर्मा जी के स्वागत भाषण से हुई। हालाकिं बिलमा जी को अभी तक कुछ पता नहीं था कि आखिर चल क्या रहा है। वो तो यही सोच रहीं थी की मैनेजर ने सोसाइटी के दिशा-निर्देश दोहराने के लिए ये मीटिंग रखी है।

 

बहुत सारी यहाँ वहां की बातें करने के बाद शर्मा जी ने सरप्राइज पार्टी में से सरप्राइज को अलग किया और पार्टी को अलग।

 

मुझे आप सब तो ये बताते हुए बड़ी ख़ुशी हो रही है कि आज बिमला जी ने अपनी जिंदगी के 72 साल बड़े हस्ते हँसाते पूरे कर लिए हैं और तकरीबन 50 साल मुझे झेलते हुए। हमने हमारी जिंदगी में बहुत से उतार चढाव देखें हैं। मैं, जब भी गिरा बिमला जी ने मुझे संभाला। मैं एक बेफिक्रा इंसान जिसको जिम्मेदारियां का अहसास बिमला जी ने कराया। परिवार को बांधना क्या होता है? रिश्तों को कैसे संभाला जाता है ये मुझे बिमला जी ने ही सिखाया। और अगर कोई रिश्ता हम पे बोझ बन जाये और अगर हम किसी रिश्ते पे बोझ बन जाएँ तो उस रिश्ते से बाहर निकलना भी मैं बिमला जी से ही सीखा हूँ।

 

अपने गांव से शहर, शहर के किराये के मकान के अपने एक बड़े के घर और अपने बड़े से घर से इस "आशियाना ओल्ड येज सोसाइटी" के दस (10) बाई दस (10) के रूम तक का सफर मैं अकेले कभी तय नहीं कर सकता था। जब हमारे बच्चे हमें छोड़कर दूर परदेस में बस गए और हमें यहाँ छोड़ गए, तब भी बिमला जी के सकारात्मक नजरिये और हर परिस्थिति में लड़ने के हुनर ने हमें अब तक संभाले रखा है। मैं तो अभी भी अख़बारों के जरिये अपने बच्चों के शहर का हाल-चाल जानने की होड़ में रहता हूँ पर अब तक हमारे बच्चों ने कभी हमारा हाल-चाल नहीं जाना। अब तो 15 साल हो गए है इस सोसाइटी मैं और आप सब हमारा परिवार हो। बिमला जी ने मुझे समझाया कि 'एक बड़े से घर में छोटे से परिवार' से अच्छा ये 'एक छोटे घर में बड़ा सा परिवार' है।

 

बिमला जी आपको बर्ष-गांठ की हार्दिक शुभकामनयें।

 

शर्मा जी ने तब हंसते हुए बिमला जी की तरफ एक शुगर फ्री काजू कतली बढ़ा के कहा। याद है शादी की सुहागरात जब काजू कतली खाके ही हमने अपनी ज़िंदगी की शुरुआत की थी, आज इस आखिरी पड़ाव में भी काजू - कतली की मिठास भरें। चलो आज 72 की उम्र में तुम 22 की हो जायो और मैं 75 की उम्र में 25 का। 

 

अमित बृज किशोर खरे 'कसक'

Insta ID: @amitbkkhare and @kasakastory




रिश्तों को बनाना और बनाए रखना

 

रिश्तों को बनाना और बनाए रखना,

किस्से कहानियों में उनको सजाए रखना।

वक़्त कैसा भी हो गुजर जायेगा,

बस अपनों को दिल में बसाय रखना।

 

यादों के पिटारे से कुछ लम्हे चुरा लेना,

कभी मायूस, तो कभी खुलके मुस्कुरा लेना। 

उनसे मिल न सको तो अफ़सोस न करना,

रिश्तों की तिजोरी में यादों के रंग भरना।

तसवीर देखना और उम्मीद बनाए रखना

रिश्तों को बनाना और बनाए रखना,

 

उचाइयां छूने को आसमान बाकी है,

देखो लफ़्ज़ों के अंदर उम्मीद झांकी है।

यादों का झोँका तुझे छूके महक जायेगा,

वक़्त जहाँ था वहीँ ठहर जायेगा।

बस तुम दरवाजे पे आँखें बिछाए रखना।

रिश्तों को बनाना और बनाए रखना,

 

हम उनके है और वो हमारे हैं,

ये रिश्ते जनाब कितने सहज और प्यारे हैं।

पूरी उम्र न भी हो, एक लम्हा हसीन ही सही,

रिश्तों की चाशनी मीठी या नमकीन ही सही।

बस जुबां से चखना और मिठास बनाए रखना।

रिश्तों को बनाना और बनाए रखना,

 

अपने हैं तो रिश्ते हैं, रिश्ते हैं तो अपने हैं,

कितने खूबसूरत, कितने सुनहरे ये सपने हैं।

अपनों को, इन सपनो को सजाये रखना,

खुद को इन बंधनों में उलझाए रखना।

हो रोशन ऐसी समां जलाये रखना,

रिश्तों को बनाना और बनाए रखना।

 

अमित बृज किशोर खरे 'कसक'

Insta ID: @amitbkkhre and @kasakastory





जिम्मेदार

 


यार, ये क्या चल रहा है,

इतना फासला क्यों बढ़ रहा है।

आँखों के नीचे काले से घेरे हैं,

चारों तरफ अँधेरे ही अँधेरे हैं।

उनके जिम्मेदार तुम हो, मैं नहीं।

 

ये कहकर तुमने अपना पल्ला झाड़ लिया,

और सारे गुनाहों का बिल मुझपे फाड़ दिया।

इस वायरस ने तो हवाओं में जहर घोला है,

पर तुमने? तुमने तो हमारी नशों में घोल दिया।

हमारे ही तराजू पे तुमने हमको ही तौल दिया।

और क्या दिया? हमको हमारी ही सांसों का मोल दिया।

और सीना तानकर हमसे कहते हो,

इसके जिम्मेदार तुम हो, मैं नहीं।

 

हाँ सही कहा तुमने क्योकि तुम हमारी सरकार हो,

अब सरकार तुम्हें क्या बताएं, तुम सड़ चुकी हो, बिलकुल बेकार हो।

कोई तुम्हारी सुनता नहीं, और तुम भी कहाँ किसी की सुनती हो,

बस अपना अलाप रागती हो, और ख्याबो का ताना बाना बुनती हो।

बस दिलासा भर देती हो की सब अच्छा होगा,

और अगर नहीं हुआ तो,

इसके जिम्मेदार तुम हो, मैं नहीं।

 

तसवीर बदलने का सपना दिखाया था, तुमने तो तकदीर बदल दी,

अरे तुम तो वो मासूका निकली, जो वोटों की खातिर रकीब के साथ चल दी।

अब भी दम भरती हो तुम अपनी कुर्सी और सरकार होने का,

क्या तुम्हें जरा भी इल्म नहीं अपनों को खोने का।

 

शायद तुमने अपनों को बनाया ही नहीं,

कोई रिश्ता या कोई बंधन निभाया ही नहीं।

बस लोगों पे इल्ज़ाम धरते हो कि

इसके जिम्मेदार तुम हो, मैं नहीं।

 

चाहे राज्य हो या साम्राज्य हो, तुम सब एक ही थाली के चट्टे-बट्टे हो,

बस अवाम मर रही है, तुम तो कुर्सी पे जमे हो और हट्टे-कट्टे हो।

10 हज़ार, 10 लाख या 10 करोड़ ही क्यों ना हो, तुमको क्या फर्क पड़ता है,

तुम तो मद-मस्त हो सत्ता की मदिरा में, तुम्हें क्या पता कौन जीता है, कौन मरता है।

 

अच्छे दिन आयेंगे और अच्छे गुजरे पिछले साल, बस इसी का भौंपू बजाते हो,

और अगर इसके शोर से कोई परेशान है, तो कहते हो

इसके जिम्मेदार तुम हो, मैं नहीं।

 

तो सुनो, इसके जिम्मेदार तुम हो, हम नहीं।

 

 

अमित बीके खरे 'कसक'

Insta ID: @amitbkkhare and @kasakastory